क्या हिमाचल में दो राजधानियां बनाना तर्कसंगत है?

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जैसे जैसे हिमाचल में चुनाव पास आ रहे हैं, नेताओं ने सरगर्मियां बढ़ा दी हैं अभी हाल ही में मुख्यमंत्री जी ने काँगड़ा दौरे में धर्मशाला को हिमाचल की दूसरी राजधानी बनाने की बातें कही थी। सत्ता पक्ष में ही कुछ मंत्रियों ने दो राजधानियों वाले बयान से असहमति जताई थी। विपक्ष भी इस मुद्दे को तूल दे रहा है, हो ना हो ये एक चुनावी मुद्दा जरूर बन जायेगा।

राजनीति महत्वकांक्षाओं को छोड़ दिया जाये तो ये कतई प्रदेश हित में नहीं है, यह एक मुद्दा है जो क्षेत्रवाद, ऊपरी और निचले हिमाचल के आधार पर वोट भुनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। क्षेत्रफल के हिसाब से देखा जाये तो हिमाचल एक छोटा राज्य है, हाँ ज्यादातर पहाड़ी भगौलिक परिस्थितियों की वजह से कुछ क्षेत्रों दूरियाँ शिमला से काफ़ी हो जाती हैं, पर सिर्फ़ कुछ एक मुश्किलों के वजह से हिमाचल पर इतना ज्यादा आर्थिक बोझ नहीं डाला जा सकता। दो राजधानियां होने का सीधा मतलब है, हर एक खर्च दोगुना या उस से भी ज्यादा ही होगा। हिमाचल पहले ही लाखों के कर्ज में डूबा हुआ है, इस तरह की योजनाओं से हालात और बिगड़ जायेगें। प्रबंधन में भी परेशानी आएगी, अगर सही तरीके से अध्ययन करेंगे तो और ज्यादा कारक पता चलेंगे।

दो दो राजधानियां बनाने के बजाये अगर एक ही राजधानी को विश्व स्तरीय और आधुनिक बनाया जाये, यातायात के संशाधनों को और विकसित किया जाये, लोगों को अधिक से अधिक सुविधा डिजिटल माध्यम से मिले तो कितना सारा पैसा और समय बचाया जा सकता है, जिसको कहीं और इस्तेमाल किया जा सकता है। हिमाचल में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकि है। राजधानी एक ही हो चाहे शिमला ही क्यों न रहे राजधानी।

रही बात शिमला की जो राजधानी होने के साथ साथ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र और एतेहासिक स्थान है, समय की मांग तो यह है की राजधानी हिमाचल के किसी और शहर में बनाई जाये, या एक नया शहर विकसित किया जाये जो हिमाचल के केंद्र में हो और वहां आना-जाना हर हिमाचली के लिए अधिक सुविधा जनक हो। इस तरह से हम शिमला को और अधिक कंक्रीट का जंगल बनने से बचा सकते हैं, और हिमाचल की सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी के तौर पर स्थापित किया जा सकता है। मण्डी जिला का सुंदरनगर शहर बनने के लिए सबसे उपयुक्त शहर है, बल्ह घाटी के छोर में बचा सुंदरनगर आदर्श राजधानी बन सकता है, हिमाचल के केंद्र में और बल्ह घाटी में स्थित होने के साथ साथ यह पूरे हिमाचल से 12 महीने जुड़ा रहता है। साथ ही साथ जाहू भी राजधानी बनाने के लिए एक सही शहर है। आशा की जा सकती है की राजनीती के बजाये, लोक हित और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए राजधानी के बारे में फिर से विचार किया जाना चाहिए।

लेखक – नीब


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