दर्दनाक सड़क हादसों ने फिर से सवाल के घेरे में लिए सड़कों के हालत

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हिमाचल में आये दिन सड़क हादसे होते रहते है। हादसे के बाद जाँच के आदेशों के अलावा और कुछ नहीं होता। सड़कों की हालत जस से मस नहीं होती। दुर्घटना के कई कारण हो सकते है, घटित दुर्घटना की सही से जाँच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त करवाई हो, ताकि भविष्य में घटनाओं की पुनरावृति न हो।

हाल ही में हुए दो बड़े सड़क हादसों ने प्रदेश को हिला दिया। दोनों ही सड़क दुर्घटनाओं में बहुत हद तक सड़क की हालत जिम्मेवार नजर आ रहे हैं, खास कर के जोगिन्दर नगर बस दुर्घटना में तो सही तौर पर सड़क के साथ घाटी की तरफ की गई खुदाई एक मुख्य वजह है, एक तो सड़क पहले ही दयनीय हालत में है ऊपर से पाइपों को बिछाने के लिए की जा रही खुदाई से सड़क वाहनों के लिए खतरनाक बन गई है। नियमों को ताक पर रख कर बेतरतीब ढंग से खुदाई हुई है, जिसकी जाँच होनी चाहिए और दोषिओं को सजा हो।
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यह बात समझ नहीं आती क्यों हर तीसरे चौथे साल पाइपें बिछाने की लिए खुदाई करनी पड़ती है। क्या एक बार खुदाई कर के एक बड़ा सा पाइप नहीं डाला जा सकता ? अगर भविष्य में नए लाइन बिछाने की जरुरत भी पड़े तो, तारों को पहले से डाली गई पाइप में बिना खुदाई के डाला जा सकता है। जिससे बार बार खुदाई का खर्च भी नहीं होगा और सड़कों को भी नुकसान नहीं होगा।

दोपहिया वाहनों के लिए तो सड़कों के गड्ढे आए दिन दुर्घटना का कारण बनते रहते है। जिस तरह से लोक निर्माण विभाग सड़कों का निर्माण और रखरखाव करता है उस से विभाग की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान उठता है। आमद यह है की कुछ महीनों के अंदर नई की गई टायरिंग उखड़ जाती है, सड़क बस गड्ढों ही गड्ढों से भरी रहती है। कहीं न कहीं कुछ तो गोलमाल हो रहा है, जो इतने निम्न स्तरीय सामग्री और काम चलाऊ सड़कें बन रही है।

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घटनाओं का कारण केवल सड़कें ही नहीं है, लापरवाही से वाहन चलाना भी बहुत बड़ा कारण है, गाड़ी चलते वक्त सावधानी वर्तनी चाहिए और निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए :-

1. शराब पी कर गाड़ी न चलाएं न चलाने दें।
2. गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल का उपयोग कभी न करें।
3. गलत जगह ओवरटेक न करें।
4. ख़राब सड़क पर गाड़ी धीरे चलाएं।
5. लापरवाही से गाड़ी न चलाएं।
6. गाड़ी चलाते समय सभी नियमों का पालन करें।

हर साल बहुमूल्य जिंदगियाँ सड़क हादसों का शिकार हो जाती है, न अभी तक सड़कें दुरुस्त हो पाई है न ही कोई जाँच अपने अंजाम तक पहुंची है।

लेखक – हेमलता

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