रिवालसर झील

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रिवालसर झील मण्डी जिला का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है, रिवालसर को त्रिसंगम स्थल भी कहा जाता है क्योकिं रिवालसर तीन धर्मो को मानने वालों का महत्वपूर्ण स्थान है, प्राचीन काल में रिवालसर बौद्ध, हिन्दू और सिख़ प्रमुख केंद्र रहा है, यहाँ बहुत सारे बौद्ध मठ और मंदिर हैं, रिवालसर में ऐतिहासिक गुरुद्वारा भी है, तिब्बती भाषा में रिवालसर को ताओ पेमा लोटस झील भी बोलते हैं।

रिवालसर मंडी से 24 किलोमीटर की दुरी पर है और समुद्र तल से 1365 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। रिवालसर झील मध्य हिमालयी झील है यह पहाड़ी पर अंडाकार आकृति में है, इस प्रकितिक झील के अलावा कुछ और छोटी छोटी झीलें रिवालसर से थोड़ी दुरी पर हैं, स्थानीय लोग उन्हें सात सर के नाम से जानते हैं, इन सात छोटी छोटी झीलों में से ज्यादातर अब सूख चुकी हैं। रिवालसर एक सूंदर स्थान है यहाँ झील से साथ ही एक छोटा सा चिड़ियाघर भी है।

रिवालसर में 7वीं शताब्दी में तिब्बत से आये बौद्ध धर्मगुरु पदमसंभव यहाँ साधना की थी, साथ ही लोमस ऋषि ने भी यहाँ तपस्या की थी, यहाँ लोमस ऋषि को समर्पित एक मंदिर भी बनाया गया है। यहाँ तीन बौद्ध मठ भी है, जहाँ बौद्ध भिक्षु शिक्षा ग्रहण करते हैं। फरवरी महीने के अंत में हर साल यहाँ सिसु मेले का आयोजन होता है, जिसमे बहुत सारे लोगों आते हैं। बैसाखी के उपलक्ष्य पर भी यहाँ मेला आयोजित किया जाता है।

रिवालसर प्रकितिक सौंदर्य से भरपूर हैं, यहाँ लोगो घूमने और पिकनिक मानाने आते रहते हैं, रिवालसर में बहुत सारे देखने योग्य स्थान है –

रिवालसर झील और चिड़ियाघर – तक़रीबन 1.5 किलोमीटर की परिधि वाली इस झील के आसपास रिवालसर बस्ता है, झील से साथ साथ, तीन मंदिर और तीन बौद्ध मठ भी हैं। झील से थोड़ा ऊपर मण्डी के राजा द्वारा बनाया गया गुरुद्वारा भी है, झील के पास ही एक छोटा सा चिड़ियाघर भी है।

गुरु पदम् संभव प्रतिमा – 123 फुट ऊँची पदम् संभव की प्रतिमा झील से थोड़ा ऊपर स्थापित है। इस प्रतिमा को काफ़ी दूर से भी देखा जा सकता है, यह प्रतिमा हिमाचल प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा है।

गुफा – रिवालसर से 5 किलोमीटर की दुरी पर स्थित इस गुफा में माना जाता है की गुरु पदम् संभव ने तपस्या की थी, आजकल यहाँ बौद्ध भिक्षुओं को मंत्रो चारण करते देखा जा सकता है, यहाँ तिब्बती भाषा में लिखे अनेक शिला लेख भी हैं।

सरकीदार और 7 झीलें – रिवालसर यहाँ की सात झीलों में से एक है, बाकि की झीलें रिवालसर से ऊपर सरकीदार पहाड़ी पर हैं, इस पहाड़ी का नाम इन झीलों के कारण ही पड़ा है स्थानीय भाषा में झील को ‘सर’ का जाता है। ज्यादातर झीलें अब सूख चुकी है, उनके अवशेष मात्र रहे हैं, तीन झीलों में अभी भी पानी है जिनमें से सबसे बड़ी कुन्त भयोग झील है, जिसमे सबसे ज्यादा पानी होता है। 1750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील देखने योग्य है।

नैना देवी मंदिर – पहाड़ी की छोटी पर बना यह मंदिर 1850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, साफ़ मौसम में यहाँ से हिमालय की ऊँची ऊँची चोटियों को निहारा जा सकता है, यहाँ लगभग हमेशा तेज़ हवा चलती रहती है। यहाँ से बल्ह घाटी का भी सूंदर नज़ारा दिखाई देता है। मंदिर तक बस योग्य सड़क है, यहाँ तक मण्डी से बस भी आती है।

प्रमुख स्थानों से रिवालसर की दुरी

मण्डी से रिवालसर – 24 किलोमीटर
कुल्लू से रिवालसर –93 किलोमीटर
शिमला से रिवालसर (वाया मण्डी) – 190 किलोमीटर
चंडीगढ़ से रिवालसर (वाया मण्डी)– 225 किलोमीटर

रिवालसर की कुछ तस्वीरें –

 

फोटो सौजन्य – NewHP.NET
Disttmandi.com

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