प्राकृतिक खेती किसानों का भविष्य हैः राज्यपाल

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शिमला – राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उत्तर प्रदेश के जिला मुज़फ्फरनगर के सिसोली में आज किसान पंचायत को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसान वास्तविकता में स्वयं कृषि वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने सदियों तक समाज को पोषित किया है तथा अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा लघु अवधि के लाभ पाने के लिए रसायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से वे कठिनाई में हैं तथा उपजाऊ भूमि बंजर बन गई है। किसानों द्वारा रसायनों के प्रयोग से भूमिगत जल विषैला हो रहा है, जिससे भयानक बिमारियां पनप रही है।
उन्होंने कहा कि फसलों का उत्पादन घट गया है तथा किसानों को रसायनिक खाद खरीदने के लिए कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह घिनोना चक्र किसानों की आर्थिकी के हित में नहीं है।
उन्होंने किसानों से सरल तथा पारम्परिक खेती का अनुसरण करने का आग्रह किया। इस खेती में किसी प्रकार का खर्चा शामिल नहीं है, क्योंकि यह शून्य लागत प्राकृतिक खेती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं अपनी 200 एकड़ भूमि पर इस खेती का कार्यान्वयन किया है तथा इस भूमि में उपजी फसलों के लिए निरतंर अच्छे दाम पाए हैं। खाद्यानों की गुणवत्ता उत्कृष्ट तथा मनुष्य उपभोग के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा जीवनअमृत को तैयार करने के बारे बताया। उन्होंने कहा कि किसानों को रसायनिक तथा जैविक दोनों तरह की खेती का अनुभव है तथा इनके परिणाम उनके समक्ष हैं, इसलिए वह किसानों को शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
मुज़फ्फरनगर के सांसद डॉ. संजीव बलियां ने अपने गृह विधानसभा क्षेत्र में राज्यपाल आचार्य देवव्रत का स्वागत किया तथा कहा कि खेती अनेक चुनौतियों के कारण एक लाभदायक व्यवसाय नहीं रह गया है। उन्होंने किसानों की समस्या पर विचार करने तथा शून्य लागत प्राकृतिक खेती का विकल्प प्रदान करने के लिए राज्यपाल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा जताई की क्षेत्र के किसान प्राकृतिक खेती अपना कर लाभान्वित होंगे।
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय प्रधान चौधरी नरेश टिकैत ने इस अवसर पर राज्यपाल का स्वागत किया तथा किसान समुदाय के कल्याण के लिए प्राकृतिक खेती के मॉडल की पहल करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

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