कमरुनाग झील

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Pic Credit - disttmandi.com

कमरुनाग झील मण्डी जिला की प्रसिद्ध झील है, कमरुनाग झील के किनारे बड़ा देव कमरुनाग का मंदिर है जो मण्डी जिला और आसपास के इलाकों में काफ़ी प्रसिद्ध है। कमरुनाग झील समुद्र तल से तक़रीबन 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कमरुनाग बहुत ही सूंदर स्थान है, कमरुनाग झील देवदार के जंगल से घिरी हुई है, यहाँ के वातावरण में शुद्ध ताज़ी और ठंडी हवा का आनंद लिया जा सकता है। सर्दियों में बर्फ से ढकी हुई झील और भी सूंदर लगती है। कमरुनाग के लिए लोगों को पैदल ही जाना पड़ता है क्योंकि अभी तक कमरुनाग तक कोई सड़क नहीं बनी है, कमरुनाग के लिए नजदीकी सड़क रोहांडा में है, रोहांडा से करीब 5 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई वाला पैदल रास्ता कमरुनाग के लिए जाता है पत्त्थरीला और चढ़ाई वाला होने के कारन यह काफी कठिन रास्ता है। रोहांडा मण्डी से 55 किलोमीटर और सुंदरनगर से 35 किलोमीटर की दुरी पर है।

सरनौली मेला – कमरुनाग में हर साल 14 से 16 जून तक मेला होता है, झील के किनारे होने वाले इस मेले में बहुत से लोग पैदल चल कर आते हैं। श्रद्धालु आस्थास्वरूप झील में सिक्के और ज़ेवरात फेंकते हैं, इस झील में कितने सिक्के और अन्य कीमती धातुएं है आज तक पता नहीं चल पाया है।

देवदार के घने जंगलों से घिरा कमरुनाग अत्यंत ही सूंदर स्थान है, अधिक ऊंचाई पर होने के कारण यहाँ का वातावरण हमेशा ही ठंडा रहता है। गर्मियों में ही ज्यादतर लोग कमरुनाग घूमने आते हैं, सर्दियों में बर्फ पड़ने की वजह से यहाँ पहुंचना थोड़ा मुश्किल है। कमरुनाग के मौसम का कुछ कहा नहीं जा सकता, यहाँ अचानक ही बारिश हो जाती है, जिसकी वजह से ठण्ड बढ़ जाती है इसलिए कमरुनाग आती बार गर्म कपड़े साथ लाने चाहिए।

केवल मेले के दौरान ही यहाँ ठहरने के लिए अस्थाई व्यवस्था होती है, यहाँ मंदिर की सराएँ तो मौजूद है पर मंदिर में मेलों के समय ही लोग होते हैं। किसी और समय आने पर यहाँ सिर्फ दिन दिन में ही आया जा सकता है, या तो अपने कैंपिंग के सामान से साथ रात को रुका जा सकता है, बहुत से लोग यहाँ ट्रैकिंग के लिए भी आते हैं। रोहांडा के अलावा धंग्यारा से भी कमरुनाग के लिए रास्ता है, यह रास्ता कभी रोमांचक और प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर है। तीसरा रास्ता सरोआ से है जो करीब 8 किलोमीटर है, यह रास्ता भी ट्रैकिंग के लिए काफ़ी मशहूर हो रहा है।

कमरुनाग आने से पहले खाने पीने का सामान अपने साथ जरूर लेकर आएं, मेलों के अलावा बाकी समय यहाँ खाने पीने का कोई साधन नहीं है।

कमरुनाग में ट्रैकिंग और कैंपिंग की काफ़ी संभावनाएं हैं, अभी बहुत कम लोग ट्रैकिंग के लिए यहाँ आते हैं, ज्यादातर श्रद्धालु सरनौली मेले के उपरांत ही कमरुनाग झील के लिए आते हैं, मेलों में तो यहाँ काफी भीड़ होती है। अगर ट्रैकिंग और कैंपिंग को बढ़ावा दिया जाये तो यहाँ काफी पर्यटक खींचे चले आयेगें।

मौजूदा ट्रैकिंग रास्ते –

1 . रोहांडा से कमरुनाग (5-6 किलोमीटर) – 2 से 3 घण्टे का रास्ता (यह कमरुनाग जाने का प्रमुख रास्ता है।)
2. सरोआ से कमरुनाग – 8 किलोमीटर
3. धंग्यारा से कमरुनाग – 10 किलोमीटर
4. कमरुनाग से शिकारी देवी – 16 किलोमीटर

प्रमुख स्थानों से दुरी

मण्डी से रोहांडा – 55 किलोमीटर
सुंदरनगर से रोहांडा – 35 किलोमीटर
मनाली से रोहांडा – 165 किलोमीटर
शिमला से रोहांडा – 148 किलोमीटर
चंडीगढ़ से रोहांडा – 208 किलोमीटर

कमरुनाग झील की कुछ तस्वीरें –

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